हवा धीरे आना
नींद भरे पंख लिये झूला झूला जाना
नन्ही कली सोने चली हवा धीरे आना
नींद भरे पंख लिये झूला झूला जाना
नन्ही कली सोने चली

चाँद किरन सी गुड़िया नाजों की है पली - २
आज अगर चाँदनिया आना मेरी गली
गुन गुन गुन गीत कोई हौले हौले गाना
नींद भरे पंख लिये झूला झूला जाना

रेशम की डोर अगर पैरों को उलझाए - २
घुंघरू का दाना कोई शोर मचा जाए
दाने मेरे जागे तो फिर निंदिया तू बहलाना
नींद भरे पंख लिये झूला झूला जाना
नन्ही कली सोने चली हवा धीरे आना

Written by : मजरूह सुलतानपुरी

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