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किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम

तू मुझसे ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ
रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिये आ

आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
रंजिश ही सही

आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
रंजिश ही सही

पहले से मरासिम ना सही फिर भी कभी तो
रस्म-ओ-रह-ए-दुनिया ही निभाने के लिये आ

माना के मुहब्बत का छुपाना है मुहब्बत
चुपके से किसी रोज़ जताने के लिये आ

कुछ तो मेरे पिंदार-ए-मुहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझको मनाने के लिये आ

जैसे तुझे आते हैं, न आने के बहाने
ऐसे ही किसी रोज़ न जाने के लिये आ

अब तक दिल-ए-ख़ुशफ़हम को हैं तुझ से उम्मीदें
ये आख़िरी शम्में भी बुझाने के लिये आ

इक उम्र से हूँ लज़्ज़त-ए-गिरिया से भी महरूम
ऐ राहत-ए-जाँ मुझको रुलाने के लिये आ

Writter name: Talib Baghpati

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